Saturday, April 24, 2010

हरजीत की गज़ल और दीपक का पोस्टर


हरजीत को गये ग्यारह वर्ष हो गये.लेकिन उसका जिक्र यूं होता है जैसे वह यहीं कहीं हो.अभी झोला भूल आया है जिसमें दोस्तों का इन्तजाम भी है.
यहां हम हरजीत को याद करते हुए हरजीत के संगी कलाकार दीपक कुमार उर्फ़ दीपक देहरादूनिया का बनाया पोस्टर लगा रहे हैं. ( अब जयपुर वासी दीपक पर एक पोस्ट जल्द ही लगायी जायेगी)

6 comments:

परमजीत बाली said...

बढिया प्रस्तुति।आभार।

सागर said...

Jai Ho!

दिलीप said...

aakri panktiyon ne dil jeet liya...dagabaazon ke naam...waah...bahut achcha...

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

matla aur uske baad ka sher sabse qamyaab lage...achhi ghazal hui hai

रवि कुमार, रावतभाटा said...

एक उम्दा ग़ज़ल...
और बेहद प्रभावी पोस्टर...

आभार...

tarav amit said...

"मुल्क होता जा रहा है कुछ दगाबाजों के नाम "
बहुत सटीक बात!
बहुत उम्दा ग़ज़ल और पोस्टर !