Sunday, October 29, 2017

रनर

"नवरंग" के वार्षिकांक (2017) में प्रकाशित कहानी ‘रनर’- पूंजीवाद चुनाव तंत्र के उस रूप से साक्षात्कार कराती है जिसमें चुनाव प्रक्रिया एक ढकोसला बनती हुई दिखती है। 
नील कमल मूलत: कवि है, और ऐसे कवि हैं जिनकी निगाहें हमेशा अपने आस पास पर चौकन्नी बनी रहती हैं। कहानी एवं उनके आलोचनात्‍मक लेखन पर भी यह बात उतनी ही सच है। यह भी प्रत्यक्ष है कि उनकी रचनाओं की प्रमाणिकता एक रचनाकार के मनोगत आग्रहों से नहीं, बल्कि वस्‍तुगत स्थिति के तार्किक विश्ले षण के साथ अवधारणा का रूप अख्तियार करती है। कवि, कथाकार एवं आलोचक नील कमल की यह महत्व पूर्ण रचना ‘रनर’, जिसको पढ़ने का सुअवसर मुझे उसके प्रकाशन के पूर्व ही मिल गया था, इस ब्लाग के पाठकों के लिए प्रस्तु त है। कथाकार का आभार कि कहानी को प्रकाशित करने की सहर्ष अनुमति दी। आभार इसलिए भी कि उनकी इस रचना से यह ब्‍लाग अपने को समृद्ध कर पा रहा है।

वि.गौ.

कहानी 

 नील कमल



दिनभर के चुनाव कार्य के बाद मतगणना समाप्त हो चुकी थी | विजयी उम्मीदवारों को पुलिस अपनी हिफाजत में बाहर ले जा रही थी | रास्ते के दोनों ओर लोग लगभग दहशत में खड़े थे | उस लड़के ने उसी समय अपने स्मार्ट फोन का कैमरा ऑन कर लिया था | थाना प्रभारी जो मौके पर सुबह से ही मौजूद था लड़के की इस हरकत पर आपे से बाहर हो गया | थाना प्रभारी ने लड़के का गिरेबान पकड़ कर उसे खींचा और उसके ऊपर जोरदार प्रहार किया | लड़का नीचे गिर पड़ा | लड़के का स्मार्ट फोन जब्त करने के बाद उसे पुलिस की जीप में लेकर वह थाने की तरफ निकल गया | इस काम को बिजली की गति से अंजाम दिया गया था लिहाजा इससे पहले कि वहाँ जमा लोग कुछ भी समझ पाते, लड़का पुलिस हिरासत में था |
1.
बड़ा ही खूबसूरत सा गाँव है यह | पक्की सड़क के दोनों तरफ धान के विस्तीर्ण खेत | एकदम हरे भरे | गाँव के निवासी यातायात की सुविधा के लिए सड़कों के किनारे आ बसे हैं | वरना गाँव की मूल आबादी पहले इस सड़क से काफी भीतर की ओर बसती थी | सड़क बमुश्किल 12 फीट चौड़ी है | यह सड़क गाँव से निकल कर पूरब दिशा में एक भेरी पर समाप्त हो जाती है और पश्चिम दिशा में शहर की तरफ जाने वाले मुख्य मार्ग से जुड़ती है | भेरी, मतलब विशाल जलाशय | सड़क के दाहिने-बाँये, जहां-तहां गहरी खाईं है जो इस वक़्त शैवाल से भरी पड़ी थी | यह खाईं शायद मकानों के निर्माण के लिए निकाली गई मिट्टी के कारण बन गई होगी जिसमें बरसात का पानी ठहर जाता होगा | इस क्षेत्र में ऐसी खाँइयों को खाल कहते हैं | आधुनिक आर्किटेक्चरल डिजाइन वाले भवनों को देखकर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि गांव में सम्पन्न लोग भी अच्छी संख्या में होंगे | लेकिन इस संपन्नता के बीच ही मिट्टी के परंपरागत घर भी हैं जिनपर टिन या पुआल की छप्पर पड़ी है | इन घरों के बाहर मुर्गियों के चूज़े, बत्तखें और बकरियाँ दिख जाती हैं | ये आदिवासी परिवार हैं जो विकास की दौड़ में तमाम सरकारी योजनाओं और घोषणाओं के बावजूद जीवन स्तर के मामले में अभी भी पिछड़े हुए हैं और छोटे मोटे काम के लिए सम्पन्न घरों की तरफ देखते रहते हैं |

इस गाँव के किसी किसान ने आज तक आत्महत्या नहीं की | पढ़े लिखे युवा गाँव छोड़कर नौकरियों की तलाश में शहर जरूर निकल गए थे पर कुल मिलाकर यह एक खुशहाल गाँव था | खेती यहाँ आजीविका का मुख्य साधन थी | धान की तीन फसलों के अलावा आलू, सरसो की खेती यहाँ के किसान बड़ी कुशलता के साथ करते | अधिकांश परिवारों से कोई न कोई व्यक्ति उस बैंक का सदस्य था जिसके बोर्ड के गठन के लिए यह चुनाव हो रहा है | ये किसान अपनी फसलों का बीमा कराते थे | उन्नत किस्म के बीज, रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक के प्रयोग में ये निपुण थे | यह बैंक इनकी अपनी संस्था थी जो इन्हें खेती के लिए आवश्यकतानुसार ऋण भी उपलब्ध कराती थी | बैंक का सालाना लाभ दस लाख रुपए तक निश्चित ही हो जाता था | एक करोड़ रुपए की रकम गाँव के किसानों ने अपनी गाढ़ी कमाई और बचत से बैंक के पास अमानत के तौर पर जमा रखी थी जिससे बैंक की व्यावसायिक जरूरत पूरी होती थी | गाँव की महिलाएँ किसी न किसी स्वनिर्भर समूह से जुड़ी थीं और आर्थिक रूप से स्वच्छंदता को महसूस करती थीं | गाँव में एक सरकारी स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र भी ठीक ठाक काम कर रहे थे |

2.
दिनभर के चुनाव कार्य के बाद मतगणना समाप्त हो चुकी थी | विजयी उम्मीदवारों को पुलिस अपनी हिफाजत में बाहर ले जा रही थी | रास्ते के दोनों ओर लोग लगभग दहशत में खड़े थे | उस लड़के ने उसी समय अपने स्मार्ट फोन का कैमरा ऑन कर लिया था | थाना प्रभारी जो मौके पर सुबह से ही मौजूद था लड़के की इस हरकत पर आपे से बाहर हो गया | थाना प्रभारी ने लड़के का गिरेबान पकड़ कर उसे खींचा और उसके ऊपर जोरदार प्रहार किया | लड़का नीचे गिर पड़ा | लड़के का स्मार्ट फोन जब्त करने के बाद उसे पुलिस की जीप में लेकर वह थाने की तरफ निकल गया | इस काम को बिजली की गति से अंजाम दिया गया था लिहाजा इससे पहले कि वहाँ जमा लोग कुछ भी समझ पाते, लड़का पुलिस हिरासत में था | यह बैंक के प्राक्तन सचिव का इकलौता बेटा था जो शहर के प्रतिष्ठित कॉलेज में पढ़ता था और खास तौर पर इस चुनाव में वोट डालने के लिए गाँव आया हुआ था |

राजनीति उस जोरन की तरह है जो सद्भाव रूपी दूध में जब पड़ जाता है तो वह दूध अपना प्राकृतिक स्वरूप ही खो देता है | उसे दही में बदलते बहुत देर नहीं लगती है | राजनीति की जोरदार पैठ इस गाँव में भी थी | महिला पुरुष समेत कम से कम 2000 की आबादी का गाँव था यह | पिछले तीस वर्षों से इस बैंक के बोर्ड में एक ही दल के लोग काबिज रहते आए थे | बैंक के पिछले बोर्ड ने सदस्यता बढ़ाने में कोई रुचि नहीं दिखाई क्योंकि उसे इस बात की आशंका थी कि नए सदस्यों की राजनैतिक समझ उनसे भिन्न भी हो सकती है और ऐसी स्थिति में बैंक पर से उनका वर्चस्व भविष्य में कभी भी समाप्त हो सकता था | सदस्यता के नए आवेदन को वे यह कर कर टाल देते कि उस परिवार से एक सदस्य तो पहले ही है | नई उम्र के लोग बात को बहुत तूल न देकर शहर के निजी बैंकों में खाता खोले हुए थे हालांकि शहराती बैंकों की अपेक्षा यह बैंक अधिक सुविधाजनक था | उन्हें उम्मीद थी कि कभी जब बोर्ड बदलेगा तो उनके आवेदन भी मंजूर कर लिए जाएँगे |

इधर पिछले कुछ वर्षों में रियासत में निजाम बदलने के बाद गाँव-दखल , पंचायत- दखल, जिला-दखल जैसे नारे ज़ोर शोर से समाचार माध्यमों में सुर्खियों में आ रहे थे | बदले हुए निजाम में बैंक के बोर्ड पर शासक दल अपना कब्जा चाहता था | इतिहास अपने आप को शायद इसी तरह दोहराता है | खेल वही चलता रहता है | खिलाड़ी बदल जाया करते हैं | नहीं बदलता है कुछ तो वह है खेल का नियम | चुनाव पंचायत स्तर का था जिसमें कुल मतदाता महज 726 की संख्या में थे | गाँव की पंचायत, विरोधी दल के कब्जे में थी जबकि विधान सभा में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व शासक दल का विधायक कर रहा था | गाँव के किसानों के इस बैंक में अब तक बोर्ड के सारे सदस्य विरोधी दल से ताल्लुक रखने वाले थे | जिस दिन से नए बोर्ड के गठन के लिए चुनाव की घोषणा हुई थी उसी दिन से शासक दल ने इसे जीतने के लिए जोड़ तोड़ शुरू कर दी थी | स्वतःस्फूर्त और निष्पक्ष चुनाव की सूरत में इस बदली परिस्थिति में  शासक दल की हार निश्चित थी जिसे अगले ही साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर शासक दल किसी भी सूरत में जीत में बदलने के लिए दृढ़संकल्प था | इसकी तैयारियां बहुत पहले ही शुरू हो गई थीं

3.
बैंक के पुराने बोर्ड के सचिव गाँव के प्रतिष्ठित व्यक्ति थे और उनकी लोकप्रियता असंदिग्ध थी | उन्हें मतदान में हराना असंभव था | इधर शासक दल के समर्थकों ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया था जिससे वे उम्मीदवार ही न बनें | लेकिन जब धमकियों से बात बनती न दिखी तो थाने में प्राक्तन सचिव के खिलाफ महिला यौन उत्पीड़न का केस दर्ज करा दिया गया | केस गैर जमानती था | स्थानीय विधायक भी इस चुनाव में पूरी दिलचस्पी ले रहा था | मजे की बात यह कि इलाके का थाना प्रभारी विधायक का साला था | खेल जम गया | सचिव को गाँव छोड़ कर भूमिगत हो जाना पड़ा | किन्तु किसी तरह नामांकन पत्र उनका जमा हो चुका था इसलिए उम्मीदवारी तय हो गई थी | इधर शासक दल गाँव के प्राइमरी स्कूल के एक दबंग अध्यापक को नए सचिव के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहा था सबसे पहले विभागीय जिला अधिकारी पर दबाव बनाने का काम शुरू किया गया | मंत्री से लेकर जिला परिषद अध्यक्ष और स्थानीय विधायक की तरफ से स्पष्ट वार्ता दे दी गई कि शासक दल का बोर्ड ही वहाँ सुनिश्चित करना होगा | विभागीय अधिकारी सरकार पक्ष की तरफ से गठित चुनाव आयोग के द्वारा रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त थे | मामले की गंभीरता को समझते हुए इस चुनाव के लिए एक विश्वस्त असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर को उन्होने ज़िम्मेदारी सौंप दी | चुनाव के लिए ड्राफ्ट वोटर लिस्ट तैयार करने और चुनावी कार्यक्रम की अधिसूचना जारी करने के दौरान स्थानीय थाना प्रभारी और विधायक के साथ असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर की कई बैठकें हुईं |
बैठक के दौरान थाना प्रभारी के प्रस्ताव को सुनकर असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर को यकीन हो चला कि यह चुनाव इतना आसान नहीं होने वाला | भविष्य में उसकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है, अगर ऐसे विकट प्रस्ताव पर अमल किया गया | थाना प्रभारी ने अपने चैंबर में सिगरेट का कश खींचने के बाद धुंवा छोडते हुए जो प्रस्ताव रखा था वह भयानक था |
देखिए, आप ऐसा कीजिए कि दो सेट बैलट छपवाइए | एक सेट पर आप बूथ पर मतदान करवाइए | दूसरे पर हमारे लोग मुहर लगाएंगे | काउंटिंग से पहले आप बक्से बदल देंगे” |
“इसकी जरूरत क्या है” ? असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर ने असहज होते हुए अपना पैंतरा बदला , “आपको जीतने से ही मतलब होना चाहिए | तरीका हमें तय करने दीजिए” |
चुनाव को लेकर गाँव का माहौल उत्तप्त था | पिछली रात को ही थाना से पुलिस की जीप में सिपाही आए थे और विरोधी दल के चार युवा समर्थकों को ले जाकर लॉक अप में डाल दिया | उन पर आपराधिक मामले ठोंक दिए थे पुलिस ने | सुबह नौ बजे से मतदान आरंभ होना था | आठ बजे के लगभग जब चुनाव कर्मियों को लेकर तीन चार गाड़ियों ने गाँव की सीमा में प्रवेश किया तो मंजर किसी बड़े चुनावी जंग जैसा नजर आया | बूथ के सौ मीटर के रेंज में पुलिस ने बैरीकेटिंग कर रखी थी |  सौ डेढ़ सौ की संख्या में पुलिस कर्मी परिसर को घेरे हुए थे | मतदान के लिए बने तीन बूथों के साथ एक बड़ा सा पंडाल बनाया गया था जिसमें प्रवेश करने वालों की जांच पड़ताल चल रही थी | डी वाई एस पी मौके पर खुद मौजूद थे | थाना प्रभारी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए टहल रहे थे | बूथ संलग्न इलाके में धारा 144 लगी हुई थी |
सुबह सात बजे से ही बूथ संख्या तीन पर भारी संख्या में लोग कतार में खड़े थे | इनमें महिलाएँ और बुजुर्ग बड़ी तादाद में थे | कुछ महिलाओं की गोद में शिशु भी थे जो टुकुर टुकुर देख रहे थे और समझ नहीं पा रहे थे कि आस पास क्या हो रहा है | अन्य बूथों पर भी वोटर कतार में खड़े थे | जिला स्तर के कुछ नेता जो शासक दल की तरफ से जिला परिषद सदस्य भी थे मोटर बाइक पर गश्त लगा रहे थे | लगभग चार पाँच सौ की संख्या में लोग बूथ के सौ मीटर के दायरे में फैले हुए थे | रिटर्निंग ऑफिसर बूथ के बाहर ही थाना प्रभारी के साथ बैठे स्थिति पर नजर बनाए हुए थे | ठीक नौ बजे मतदान शुरू हुआ |
बैलट पेपर पर उम्मीदवारों के नाम और उनके चुनाव चिन्ह सिलसिलेवार छपे हुए थे | चूंकि यह किसानों के एक बैंक का चुनाव था इसलिए राजनैतिक दलों के चुनाव चिन्ह यहाँ व्यवहार में नहीं लाए जा सकते थे | बैंक के बोर्ड के लिए छह सदस्यों को इनमें से चुना जाना था |

4.
शुरू के डेढ़ दो घंटे मतदान लगभग शांतिपूर्ण ढंग से चलता रहा | पहचान पत्र के साथ लोग आते और मतदान करके चले जाते | इसके बाद पीठासीन अधिकारियों ने लक्षित किया कि लगभग हर दूसरे वोटर के साथ एक कंपेनियन वोट डालने आने लगा | कंपेनियन वोटर ! यह कुछ कुछ वैसा ही था कि जैसे क्रिकेट मैच के दौरान किसी बल्लेबाज को चोट आ जाए तो वह अपनी सहायता के लिए एक रनर बुलावा सकता है | बल्लेबाज शॉट खेलता है और रनर उसके बदले दौड़ कर रन बनाता है | चुनाव की नियमावली में इसी तरह कंपेनियन वोटर का एक प्रावधान होता है | यह उनके लिए प्रयोज्य है जो अंधे हों, शारीरिक रूप से अक्षम हों या निरक्षर हों | वे अपनी सहायता के लिए एक सहायक या कंपेनियन बूथ तक ले जा सकते हैं | आम चुनावों में ऐसे कंपेनियन उसी बूथ के वोटर भी हों यह अनिवार्य नियम होता है लेकिन इस चुनाव में ऐसी किसी अनिवार्यता कि बात स्पष्ट नहीं थी | तो कोई भी व्यक्ति जो उस वोटर को पसंद हो वह उसका कंपेनियन हो सकता था , भले ही वह किसी दूसरे गाँव का ही क्यों न हो | नियमावली की यह फाँक शासक दल को विभागीय अधिकारी ने दिखला दी थी | बाहर के गांवों से चार पाँच सौ लोग इसी तैयारी के साथ बुलवा लिए गए थे | यह बात पुलिस और प्रशासन के संज्ञान में पहले से ही थी | इस प्रक्रिया में ग्यारह बजे के बाद मतदान की गति धीमी होती गई और लोगों का जमावड़ा बढ़ता गया | कतार में लगभग हर दूसरे वोटर के साथ एक बहिरागत साये की तरह लगा हुआ था | वोटर की पहचान होती, उसे बैलट इशू होता और उस बैलट के साथ वह बहिरागत कंपेनियन मतदान कक्ष में प्रवेश कर जाता | वोटर बेचारा असहाय देखता रह जाता | यह दृश्य बदस्तूर चल रहा था | तभी दो नंबर बूथ पर अचानक तनावपूर्ण स्थिति बनती हुई नजर आई | बूथ के पीठासीन अधिकारी ने पूछताछ आरंभ कर दी थी |
महिला वोटर थी | जैसे ही बैलट उसके हाथ में आया उसके साथ वाले व्यक्ति ने उसे लपक लेना चाहा | लेकिन उसने तभी पीठासीन अधिकारी की तरफ देखते हुए उससे फरियाद की |
“साहब, मैं अपना वोट खुद डाल सकती हूँ लेकिन ये ज़बरदस्ती मेरे साथ घुसे चले आ रहे हैं” |
“क्यों भाई, आप कौन” ?
“सर, मैं इनका वोट डालूँगा” |
“क्यों, अप क्यों इनका वोट डालेंगे जबकि ये कह रही हैं कि ये अपना वोट खुद डाल सकती हैं” |
“ऐ, बैलट मुझे दे” |
“अरे, अरे, आप इधर आयें ... क्या तकलीफ है आपको ? आखिर वोटर ये हैं या आप .. आप बाहर जाएँ..” |
वह व्यक्ति जो कंपेनियन वोटर की हैसियत से बूथ के भीतर दाखिल हुआ था अब अपने रौद्र रूप में आ चुका था | दाहिने हाथ से उसने पीठासीन अधिकारी की छाती पर धक्का देते हुए बाँये हाथ से महिला से बैलट छीन लिया और बूथ के भीतर जाकर मुहर लगाने लगा | पीठासीन अधिकारी इस आकस्मिक हमले से बड़ी मुश्किल से संभला | तभी बूथ संलग्न पंडाल के बाहर विधायक की गाड़ी पूरे लाव लश्कर के साथ आकार रुकी | विधायक को बूथ की हर घटना की पल पल की खबर दी जा रही थी | गाड़ी से उतरते ही वह डी वाई एस पी पर भड़क उठा |
“आप लोग यहाँ क्या कर रहे हैं ! आपसे कहा गया था कि यहाँ पुलिस फोर्स कि जरूरत नहीं है” |
“सर, हम तो बस अपना काम कर रहे हैं” |
“तुम लोग ऐसे नहीं समझोगे बात को .. लातों के भूत हो तुम सब | अभी हटाओ फोर्स को यहाँ से” !
इसके बाद विधायक रिटर्निंग ऑफिसर की तरफ बढ़ा |
“और .. आप कर क्या रहे हैं यहाँ ! आखिए सरकार किसलिए पोस रही है आपलोगों को .. जनता के पैसे से वेतन दिया जाता है आपको” !
“सर, सबकुछ शांतिपूर्ण ढंग से हो रहा है” |
“क्या शांतिपूर्ण हो रहा है ! यहाँ क्या लोकसभा का चुनाव हो रहा है ! सुन लीजिए , कोई पहचान पत्र नहीं चेक किया जाएगा यहाँ..” |
विधायक की गाड़ी के हटते ही बूथ परिसर का माहौल एकदम से बदल गया | पुलिस बूथ छोड़ कर सड़क पर कुर्सियाँ डाल कर बैठी रही | दूसरे गांवों से आए चार पाच सौ लोग पंडाल के भीतर आ गए | धारा 144 की धज्जियां, धुनी जा रही रुई के फाहों सी उड़ती रहीं |

5.
ठीक दो बजे मतदान समाप्त हुआ | अब मतगणना कि बारी थी | ऐसे चुनावों में मतदान के तुरंत बाद ही गणना आरंभ कर देनी होती है | चुनाव के फलाफल भी मतगणना के अंत में घोषित कर दिए जाते हैं | बूथ नंबर एक पर शासक दल के पैनल को ठीक ठाक बढ़त मिल रही थी | बूथ नंबर दो पर भी यह बढ़त बनी रही | तीसरे बूथ के परिणाम में विलंब हो रहा था | इधर शासक दल के पैनल के जीत की गंध मिलते ही उनके तमाम समर्थक एक दूसरे के चेहरे पर गुलाल मलने लगे | उत्सव का दृश्य बन रहा था | लेकिन बूथ नंबर तीन के परिणाम ने गणित को उलट दिया था | मुक़ाबला कांटे का हो रहा था | अंतिम राउंड की मतगणना के मुताबिक छह सदस्यों वाले नए बोर्ड में शासक दल के तीन और विरोधी दल के पैनल से तीन सदस्य जीत रहे थे | पिछले बोर्ड के सचिव जो भूमिगत रह कर चुनाव लड़ रहे थे उनके जीतने की खबर चौंकाने वाली थी सबके लिए | 726 वोटरों में से 233 कंपेनियन वोट पड़े थे |
परिणाम घोषित किए जाने का वक़्त आ गया था | नए बोर्ड में दोनों पैनलों से तीन-तीन सदस्य जीते थे | शासक दल के समर्थक उत्तेजित थे | पीठासीन अधिकारियों को मारने की खुली धमकी देने लगे |
“साले, हमारी सरकार से वेतन लेते हो .. किसी काम के नहीं .. टाँगें तोड़ कर वापस भेजेंगे आज तुम सबको” !
इस परिणाम ने स्थिति को जटिल बना दिया था | बैंक के नियमों के मुताबिक छह सदस्यों के बोर्ड में किसी जरूरी फैसले के लिए कम से कम चार का समर्थन जरूरी था | इतना ही नहीं बोर्ड की मीटिंग के लिए भी कोरम भी चार सदस्यों की उपस्थिति से ही पूरा होता था | मिलजुल कर काम करने की संभावना नहीं दिख रही थी | लेकिन इस जटिलता का कोई जादुई हल निकालना ही होगा रिटर्निंग ऑफिसर को | चलते चलते उसने फोन पर विधायक को आश्वस्त करते हुए बड़ी मुलायमियत भरी आवाज़ में कहा, “सर, सात दिन के बाद ही ऑफिस बियरर इलेक्ट कर देंगे हम .. आप बिलकुल चिंता न करें सर ..” | इस बीच उसे उस लड़के का ख्याल आया जिसे पुलिस जीप में थाना प्रभारी थोड़ी देर पहले ले गया था | थाना प्रभारी से कह तो दिया था, “बच्चा है, केस मत दीजिएगा.. कैरियर खराब हो जाएगा बच्चे का ..” पर क्या वह उसकी बात मानेगा ?
सूरज ढलने को था | चुनाव कर्मी गाड़ियों में वापस लौट रहे थे | हाथ में गुलाल लिए कुछ लोग किंकर्तव्यविमूढ़ भाव से खड़े थे | चुनावी आंकड़ों के आधार पर यह साबित करने में कोई कठिनाई नहीं थी कि गाँव के 726 मतदाताओं में से 233 या तो अंधे थे या शारीरिक रूप से अक्षम या फिर निरक्षर | चुनाव कि भाषा में ब्लाईंड, इंफर्म ऐंड इल्लीटेरेट वोटर्स ! क्रिकेट की भाषा में इतने ही रनर !
संपर्क : 
नील कमल
244, बांसद्रोणी प्लेस (मुक्त धारा नर्सरी स्कूल के निकट) 
कोलकाता – 700070

मोबाइल – (0) 9433123379          

1 comment:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (30-10-2017) को
"दिया और बाती" (चर्चा अंक 2773)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'