( जेरार ल ग्युक वर्तमान समय के फ्रांसीसी साहित्य के एक अत्यंत महत्वपूर्ण कवि हैं। उनकी कविताओं का अनुवाद दुनिया की लगभग १५ भाषाओं में हो चुका है। ये कविताएँ मुख्य रूप से उनके काव्य संग्रह 'द्वीप और नमक की कविताएँ' (Poèmes de l'île et du sel) से चुनकर अनूदित की गई हैं।
मूल फ्रांसीसी संग्रह का बांग्ला में अनुवाद प्रसिद्ध कवि अहमद सजीब ने किया है, जो स्वयं एक कवि हैं और पिछले १८ वर्षों से फ्रांस में रह रहे हैं। उनके अनुवादों में इससे पूर्व फ्रांसीसी भाषा से 'अन्तोनिओ पोर्चिया' (Antonio Porchia) के 'स्वर' का अनुवाद भी प्रकाशित हो चुका है। अहमद सजीब के इस अनुवाद की कलकत्ता विश्वविद्यालय के एमेरिटस प्रोफेसर, कवि, आलोचक और फ्रांसीसी भाषा और साहित्य केविद्वान चिन्मय गुह ने भी बहुत तारीफ की है।
मित्र सजीब के सौजन्य से ही हिंदी साहित्य के पाठकों के लिए जेरार ल ग्युक की इन फ्रांसीसी कविताओं को अनूदित करने का अवसर प्राप्त हुआ है, इसके लिए मैं उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ।
- अजीत दाश )
कुछ कविताएं
☘
यहाँ
हवा का दूसरा किनारा
समंदर के सीने पर फैला है
और धूप भरे दिनों में
लहरों का दूसरा किनारा
बादलों की समतल छतरी पर सांप की तरह है।
बस इस द्वीप का
न कोई आइना है, न कोई अक्स।
☘
यहाँ
हम कभी-कभार ही फसल काटते हैं,
इस द्वीप की चारों ऋतुएँ पतझड़ की हैं,
चारों ऋतुएँ अकेले प्रेम की हैं।
☘
यहाँ
कोहरा इतना घना उतरता है कि
इंसान भूल जाता है
समंदर का स्थायित्व
और परिंदे अपना द्वीप खो देते हैं।
☘
यहाँ
रात में
सब कुछ बदल जाता है—
पानी की जगह आसमान ले लेता है,
द्वीप का गुंबद ईश्वर के गुंबद में मिल जाता है।
☘
यहाँ
यह द्वीप रेत नहीं है
कंकड़ों से घिरा है
जैसे उसके जख्मों पर जमी हुई पपड़ी।
☘
यहाँ हर लहर एक कैदखाना बंद कर देती है,
हर गड्ढा एक कालकोठरी बना देता है,
आसमान चारों तरफ की दीवार है
और यह द्वीप उन बैठकखानों में से एक है।
☘
यहाँ
सब कुछ एक-दूसरे के विपरीत खड़ा है,
एक-दूसरे के ऊपर बहता है,
दबता है, टूट जाता है,
फिर भी कुछ खोता नहीं, कुछ मिटता नहीं।
☘
यहाँ झाग की परतें जम जाती हैं
मुड़े हुए चाँद की तरह।
ऐसा लगता है जैसे रेत
पानी के नीचे फिसल रही हो।
और क्षितिज पर मालवाहक जहाज
किसी कैथेड्रल का रूप ले लेते हैं।
☘
यहाँ जब प्यार खत्म हो जाता है,
तब प्यार इंसान को कहीं और बहुत दूर ले जाता है
जिंदगी को धकेल देता है
एक जहाज के डूबने से भी कहीं ज्यादा दूर।
☘
यहाँ
हमें लगता है कि मधुमक्खियाँ
नमक इकट्ठा करती हैं
लहरों के बगीचे में।
☘
यहाँ
शब्दों का इस्तेमाल खो गया है
सिर्फ खामोशी की जुबान
फैलाई जाती है।
☘
यहाँ
पैदा होते ही इंसान
दर्ज हो जाता है
हमेशा की विस्मृति में।
☘
यहाँ
रातें खामोश नहीं रहतीं।
लाइटहाउस की रोशनी में
चटक जाती है अलमारी की लकड़ी,
खनखना उठते हैंबर्तनों की अलमारी में रखे बर्तन।
☘
यहाँ
हर कविता एक जवाब लेकर आती है
जो कभी कोई सवाल थे ही नहीं।
☘
यहाँ
मौत की तरफ मर्दों का झुकाव
धीरे-धीरे धीमा पड़ जाना है, जैसे विलुप्त हो जाती है
समंदर की गोद में बिताई उस पहली रात की याद।
☘
यहाँ
वक़्त गुजर जाता हैं
फूलों के नमकीन घंटों में,
गुलाबी गूदे की आभा में।
☘
यहाँ
भारी अंधेरे मौसम में
पत्थर सोचते हैं कि वे पीतल के टुकड़े हैं
और द्वीप एक ड्रम है।
☘
यहाँ दरवाजे छोटे हैं ताकि किसी औरत के कमरे में
दाखिल होते वक्त मर्द खुद को विनम्र कर सके,
और गिरजे की सीढ़ियां ऊँची हैं
ताकि मर्द उन पर चढ़कर
उस ऊँचाई तक जा सके।
☘
यहाँ
समझने का अर्थ है देखना,
देखने का अर्थ है सुनना,
सुनने का अर्थ है महसूस करना,
और प्यार करने का अर्थ है हमेशा छोड़ देना।
☘
यहाँ
ओले गिरने की के वक्त
समंदर जल उठता है
आग में ज्वलते हुए किसी गिरजाघर की तरह।
☘
यहाँ
जब हम अपनी हथेलियों के प्याले में समंदर को लिए
सूरज की तरफ फैलाते हैं
तो देखते हैं नमक के सफ़ेद बादल या उसके भीतर की हंसी
पानी में तेल की तरह तैरता है।
☘
यहाँ
यहाँ, इस द्वीप पर मर्द बहुत कम मरते हैं
कब्रिस्तान
उनके लिए एक विदेशी द्वीप है
☘
यहाँ
ईश्वर का अस्तित्व कोई मोह पैदा नहीं करता,
बल्कि इंसान का स्थायित्व
पत्थरों पर उसके काम के जरिए दिखता है,
संतरे के भीतर के हिस्से की तरह ही सुरक्षित और सटीक।
☘
यहाँ
सब कुछ काम है
यहाँ तक कि ख्यालों में लहरों का
साथ देना भी।
☘
यहाँ,
कोई सुखी है या नहीं, यह समझने के लिए
उसकी तरफ नहीं, देखना पड़ता है उसके पैरों के पास
वहाँ बैठे हुए उसके कुत्ते की आँखों में।
--------------------------------------------------------------------
जेरार ल ग्युक (Gérard Le Gouic) वर्तमान समय के अग्रणी फ्रांसीसी कवि हैं। उनका जन्म 11 जून, 1936 को पेरिस में हुआ था। उनका परिवार ब्रिटनी (Brittany) के रेडन (Redon) का निवासी था। उनके पिता पेरिस के परिवहन विभाग (RATP) में कार्यरत थे, जिसके कारण ल ग्युक का बचपन पेरिस और रेडन के बीच बीता। पेरिस के कॉलेज लावोइज़ियर (Lavoisier) में पढ़ाई के दौरान उन्हें कवि मॉरिस फombeure (Maurice Fombeure) एक शिक्षक के रूप में मिले।
1958 से 1968 तक उन्होंने व्यापारिक कार्यों के सिलसिले में अफ्रीका महादेश के विभिन्न देशों में निवास किया। उनकी पहली कविता पुस्तक 'Que la Mer Vienne' (सागर आने दो) 1958 में प्रकाशित हुई थी। उन्होंने साहित्य की विभिन्न विधाओं में कार्य किया है और उनकी प्रकाशित पुस्तकों की संख्या लगभग 60 है। उनकी पुस्तक 'Poème De L'île Et Du Sel' (द्वीप और नमक की कविताएँ) समकालीन फ्रांसीसी कविता में एक महत्वपूर्ण योगदान मानी जाती है।
जेरार ल ग्युक की कविताओं का अनुवाद दुनिया की लगभग पंद्रह भाषाओं में हो चुका है। कविता के क्षेत्र में उन्हें प्रिक्स अल्फ्रेड-डे-मुसेट (1977), प्रिक्स एंटोनिन-आर्टौड (1980), और ग्रैंड प्रिक्स इंटरनेशनल ड्यू मोंट-सेंट-मिशेल (1986) सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। 1969 से वे स्थायी रूप से ब्रिटनी (Brittany) में रह रहे हैं।
(अनुवादक
: अजीत दाश का जन्म वर्ष 1989 में कोमिल्ला, बंगलादेश मेंहुआ ।आपने
कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में पढ़ाई की। एक ग्राफिक आर्टिस्ट तौर पर
काम करते हैं। दो पुस्तकें आप लिख चुके हैं।
हिन्दी ,उर्दू और
अंग्रेजी कविताओं का बंगला में अनुवाद करते रहें। हिन्दी कविताओं के प्रति
आपकी विशेष रुचि है। किसी भी तरह के सांप्रदायिकता विचार का आप प्रतिकार
करते हैं। अनुवाद आपके लिए भौगोलिक-सांस्कृतिक संकीर्णता के पार जाने का
रचनात्मक उपक्रम है।)

