Sunday, December 18, 2022

दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी - प्रवासी साहित्य और भारतीयता

 कोलकाता, 17 दिसंबर 2022|


भारतीय भाषा परिषद और सदीनामा के संयुक्त तत्वावधान में आज भारतीय भाषा परिषद के सभागार में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया| उद्घाटन से पहले वागर्थ के दिसंबर में अंक में प्रकाशित प्रवासी लेखिका प्रियंका ओम की कहानी ‘बाज मर्तवा जिंदगी’ का पाठ किया ‘सदीनामा’ पत्रिका की सह संपादक रेणुका अस्थाना ने| परिषद के वित्त सचिव घनश्याम सुगला ने उपस्थित विद्वानों और श्रोताओं का स्वागत करते हुए परिषद की अध्यक्ष डॉ.कुसुम खेमानी जी का संदेश सुनाया| खेमानी जी ने कहा कि आप सबों की उपस्थिति बताती है कि आप सबों को भारतीयता से अत्यधिक प्रेम है| मंच पर परिषद के पूर्व सचिव बिमला पोद्दार भी उपस्थित रहीं|

मंच पर उपस्थित विद्वानों ने तेजेंद्र शर्मा (लंदन) और डॉ. इंदु सिंह के संयोजन में आई सदीनामा प्रकाशन की पुस्तक ‘प्रवासी कहानियां’ का लोकार्पण किया|


वैचारिकी पत्रिका के संपादक बाबूलाल शर्मा ने ‘प्रवासी साहित्य में भारतीयता’ पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रवासी साहित्य पर आयोजन बहुत ही कम देखने को मिलते हैं| आज का यह कार्यक्रम इस अर्थ में बेहद महत्वपूर्ण है| वागर्थ के संपादक और भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉ.शंभुनाथ ने प्रवासी, अप्रवासी और भारतीयता के अर्थ विस्तार पर चर्चा की| उन्होंने कहा कि भारतीयता के साथ साथ स्थानीयता को भी समझना होगा|

एशियाटिक सोसायटी की प्रतिनिध चंद्रमलि सेनगुप्ता ने एशियाटिक सोसायटी की क्रायकलापों से परिचय कराते हुए प्रवासी साहित्य पर चर्चा की| उन्होंने बांग्ला के लेखक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय, विभूतिभूषण बंद्योपाध्या, सतीनाथ भादुड़ी द्वारा प्रवास में रहकर लिखे गए साहित्य से अवगत कराया| बंगवासी कॉलेज (सांध्य) के प्रिंसिपल डॉ. संजीव चट्टोपाध्याय ने आज हिंदी सीखने की जरूरत पर बल दिया| साथ ही बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में बोली जाने वाली बांग्लाभाषा के रूप सौंदर्य पर बात की|

हिंदी विश्वविद्याल, हावड़ा के उप-कुलपति प्रो.दामोदर मिश्र ने कहा कि आज इतिहास को मिटाने की कोशिश की जा रही है| ग्लोबलाइजेश हमें कहां लेकर खड़ा करेगा कहना मुश्किल है| साथ ही उन्होंने साहित्य चर्चा के माध्यम से मनुष्यता को बचाए रखने की अपील की|

प्रथम सत्र का संचालन और धनयवाद ज्ञापन सदीनामा के संपादक जीतेंद्र जितांशु ने किया|


द्वितीय सत्र में रचना संवाद के अंतर्गत आशा बोड़ाल, गोपाल भित्री कोटी, मीना चतुर्वेदी, शकील गौंडवी, रौनक


अफरोज, सेराज खान बातिश, अभिज्ञात, सुरेश शॉ, रामनारायण झा, जतिव हयाल, ओम प्रकाश दूबे, शिप्रा मिश्रा, रवींद्र श्रीवास्तव, मीनाक्षी सांगानेरिया, सोहैल खान सोहैल, रमेश शर्मा, श्रद्धा टिबड़ेवाल, पूनम गुप्ता, संतोष कुमार वर्मा, अभिलाष मीणा, सीमा शर्मा, फौजिया अख्तर, जूली जाह्नवी, मौसमी प्रसाद, वंदना पाठक, रश्मि भारती, मोहन तिवारी, नीतू सिंह गदौलिया ने अपनी कविता का पाठ किया|

इस सत्र का संचालन और संयोजन किया रचना सरन, संदीप गुप्ता, सोहैल खान सोहैल, मीनाक्षी सांगानेरिया, रेणुका अस्थाना,