Friday, October 9, 2009

मशहूर चित्रकार रोरिख का जन्मदिवस है आज



मशहूर चित्रकार निकोलाई रोरिख का जन्म 9 अक्टूबर 1874 को रूस के एक उच्च मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था। रोरिख बचपन से ही चित्रकार बनना चाहते थे पर उनके पिता जो कि वकील एवं नोटरी थे, उनको ये पसंद नहीं था इसलिये रोरिख ने वकालत और चित्रकारी की शिक्षा साथ-साथ ली।


अपने जीवन काल में रोरिख ने लगभग 7000 पेंटिंग्स बनाई। जिनमें विभिन्न तरह की पेंटिंग्स शामिल हैं। पर रोरिख की पहचान ज्यादा उनकी लैंडस्केप पेंटिंग्स के कारण ही है। पेंटिंग के अलावा रोरिख ने कई विषयों में किताबें भी लिखी जिनमें प्रमुख है फिलोसफी, धर्म, इतिहास, आर्कियोलॉजी साथ ही रोरिख ने कुछ कवितायें और कहानियां आदि भी लिखे। पूरे विश्व में शांति के प्रचार प्रसार के लिये रोरिख ने कई म्यूजियम एवं शैक्षणिक संस्थान आदि की भी स्थापना की।


रूस में 1917 की क्रांति के बाद से रोरिख ने ज्यादा समय रुस के बाहर ही बिताया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न देशों अमेरिका, ब्रिटेन, स्वीडन आदि की यात्रा की। न्यूयॉर्क में इन्होंने रोरिख म्यूजियम की स्थापना भी की। इनके अलावा रोरिख ने ऐशियन देशों की यात्रायें भी की और हिन्दुस्तान से तो उन्हें विशेष लगाव रहा। यहां के हिमालयी स्थानों में उन्होंने अच्छा समय बिताया और यहां की संस्कृति आदि से वे बेहद प्रभावित रहे। 13 दिसम्बर 1947 को कुल्लू में रोरिख का देहांत हुआ।


अपने जीवनकाल में रोरिख को कई पुरस्कारों द्वारा नवाजा गया जिनमें प्रमुख हैं रसियन ऑर्डर ऑफ सेंट स्टेिन्सलॉ, सेंट ऐने एंड सेंट व्लादिमीर, यूगोस्लावियन ऑर्डर ऑफ सेंट साबास, नेशनल ऑर्डर ऑफ लिजीयन ऑफ ऑनर तथा किंस स्वीडन ऑर्डर ऑफ नॉर्दन स्टार। इसके अलावा उन्हें 1929 में नोबोल पुरस्कार के लिये भी नामांकित किया गया।

यहां हम उनके द्वारा बनाये गई कुछ पेंटिंग्स लगा रहे हैं


Guests from Overseas


The messenger 


The Vernicle and Saint Princes


Last Angel, 1912.


Song of Shambhala






MosesThe Leader




Chintamani 1936 

10 comments:

डॉ टी एस दराल said...

बहुत खूब याद दिलाई आपने. रोरिख की कुछ पेंटिंग्स कॉपियाँ मेरे पास भी हैं. हिमालय का बहुत खूबसूरत चित्रण किया गया है. आभार

शायदा said...

उनके काम में नीले रंग का रहस्‍य बेहद गहराया हुआ दिखता है, पहाड़ों का ऐसा रूप, कभी हैरान करता है तो कभी सोच में डाल देता है। शुक्रिया रोरिक की याद दिलाने का।

naveen kumar naithani said...

बहुत बहुत शुक्रिया, रोरिख के जन्मदिन की याद दिलाने के लिये.कलाकार रोरिख की बहुमुखी प्रतिभा के विषय में जानकारी देने के लिये विनीताजी का आभार.

Bahadur Patel said...

bahut badhiya hai.
badhai.

sanjay vyas said...

हिमालय से एक जैविक सम्बन्ध जोड़ लेने वाले इस साधक पर इस आलेख के लिए आभार.मैंने कुछ साल पहले इनके आवास को जिसे आर्ट गैलेरी में बदल दिया गया है,वहां इनके खूब सारे चित्र देखे थे. शायदा जी ने नीले रंग की प्रधानता का ज़िक्र किया है उससे कुछ चित्र अस्पष्ट से याद भी आने लगे.

मुनीश ( munish ) said...

His estate is open for public viewing in Naggar near Manali in H.P.
where he lived with his son,also a painter, and daughter-in-law Devika Rani .
More than a painter ,he was an Indologist, a first rate philosopher and noble human being . His literature is mind-blowing .One must visit his place and witness his collection of paintings and other items.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

माफी चाहूँगा, आज आपकी रचना पर कोई कमेन्ट नहीं, सिर्फ एक निवेदन करने आया हूँ. आशा है, हालात को समझेंगे. ब्लागिंग को बचाने के लिए कृपया इस मुहिम में सहयोग दें.
क्या ब्लागिंग को बचाने के लिए कानून का सहारा लेना होगा?

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

Shambhala word is very famous in WEST

Devika Rani was married in this Family as Munish bhai has said --

&
that was the later part of her long & illustrious life --
My Late Father Pandit Narendra Sharma worked for Devika Rani's " Bombay Talkies " --
& wrote lyrics for Humaree Baat

अजेय said...

रेरिख को बहुत देर देर तक देखते रहना चाहिए. तभी कुछ कम्युनिकेट हो पाता है.

सुन्दर तस्वीरें!


लेकिन हिमालय रेरिख की रहस्य दृष्टि से बढ़ कर और भी बहुत कुछ है.... काश हिमालय को कोई थोड़ा और खोल पाता!

प्रदीप कांत said...

सुन्दर तस्वीरें!