Saturday, November 29, 2025

 

 

 

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                                             विजय को याद करते हुए एक साल                                                                                               

साहित्यकार और रंगकर्मी विजय गौड़ का देहावसान हुए एक वर्ष हो गया लेकिन इस एक वर्ष में उनकी स्मृतियों ने लोगों को खूब सताया है । उनके पहले स्मृति दिवस 21 नवंबर 2025 पूर्ति और पवि गौड़ की ओर से उनके घर पर आयोजित स्मृति सभा में लोगों ने कुछ ऐसी ही‌ भावनांए व्यक्त की थी। विजय की रचनात्मकता के विभिन्न सोपानों के साक्षी रहे उनके मित्रों ने इस बार उनके व्यक्तित्व की तुलना में कृतित्व की अधिक चर्चा की। विजय गौड़ बहुत आयामी प्रतिभा के धनी थे। शतरंज के बहुत अच्छे खिलाड़ी थे और राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में भाग लिया करते थे। वह एक अच्छे ट्रेकर भी थे और साल में एक बार पहाड़ों की दुर्गम स्थानों पर ट्रैकिंग पर निकल जाया करते थे। वह ‘ लिखो यहां वहां’ नाम से साहित्यिक ब्लाग भी चलाते थे। जो लाखों लोगों द्वारा देखी जा चुकी थी। स्मृति सभा में विजय की इन्हीं बहु आयामी कृतित्व की चर्चा की गयी। विजय के हम उम्र और एक तरह से साहित्य के सहपाठी रहे डा राजेश पाल और अरुण कुमार असफल ने उनके साथ मिल कर ‘ संवेदना’  की क‌ई महत्वपूर्ण गोष्ठियों का आयोजन किया था। दोनों ने विजय के साहित्यिक अवदान की चर्चा की। विजय की दुर्गम यात्राओं के साथी रहे सी एन मिश्रा ने विजय के साथ की गयी या‌त्राओं के संस्मरण साझा किये। उन्होंने बताया कि विजय ने उनके साथ मोटर साइकिल द्वारा भारत भ्रमण की योजना भी बनायी थी और वे तैयारियों में लग भी गये‌ थे । लेकिन वह अचानक ही अकेले निकल पड़े। 

 



 कथाकार नवीन कुमार नैथानी ने विजय के उत्साही स्वाभाव का स्मरण किया। उन्होंने बताया कि उन्हें जो काम करना होता था उसे शीघ्र पूरा करने के लिए वह अधीर रहते थे। वह एक साथ क‌ई रचनाओं पर काम करते थे। निधन से पूर्व वह दो उपन्यास एक साथ लिख रहे थे और दोनों ही उपन्यास शोधपरक थे। नवीन कुमार नैथानी ने पत्रकार साहित्यकार अरविंद शेखर के साथ मिलकर विजय के ब्लाग ‘लिखो यहां वहां' के पुन: आरंभ करने की भी सूचना दी। फिल्म विशेषज्ञ और लेखक मनमोहन चढ्ढा ने विजय के उपन्यास ‘ फांस’ की मनोयोग से चर्चा की। सभा में अमेरिका से आयीं जेनेटिक विज्ञानी और लेखिका सुषमा नैथानी और दिल्ली से आए वरिष्ठ लेखक सुरेश‌ उनियाल ने भी विजय की स्मृतियों को साझा किया। सभा में लोगों ने विजय गौड़ की अप्रकाशित और असंकलित रचनाओं का संकलन निकालने की इच्छा व्यक्त की।
स्मृति सभा में साहित्यकार कुसुम भट्ट, दिनेश चन्द्र जोशी, समदर्शी बड़थ्वाल, कविता कृष्णपल्लवी , अरविंद शेखर , चंद्रकला आदि ने‌ भी‌ अपनी बात रखी थी। सभा का संचालन वरिष्ठ कवि राजेश सकलानी ने किया।

(प्रस्तुति- अरुण कुमार ‘असफल’)

 

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