Tuesday, May 6, 2008

छत से देखो दुनिया को


(पिछले दिनों से तिब्बत खबरों में है। कथाकार उदयप्रकाश तिब्बत के बारे में अपने ब्लाग पर कुछ ऐसा लिखते रहे हैं जो लोक का पुट लिये हुए है। 9 अप्रैल 2008 को जिसकी पहली कडी से हम परिचित हुए थे.
दुनिया की छत कहे जाने वाले, बर्फली चोटियों से घिरे तिब्बत में कथा गढ़ने और कथा कहने की परम्परा पीढ़ी दर पीढ़ी रही है। तिब्बत के पारम्परिक लोक साहित्य, जिसमें पौराणिक कथाएं, मिथ, नीति कथाएं आदि हैं, का अथाह भंडार है. यहां प्रस्तुत है तिब्बत की लोक कथा। ल्वोचू खरगोश की कथा श्रंृखंला की यह पहली कड़ी है। आगे ल्वोचू खरगोश की कथा की अन्य कड़ियां भी प्रस्तुत की जायेंगी।)

ल्वोचू खरगोश की कथा - एक

यालूत्साङपो नदी के तटवर्ती वन में एक घास का मैदान था। वहां झरने कलकल बहते थे, रंगबिरंगे फूल खिलते थे और नाना प्रकार के कुकुरमुत्ते उगते थे। बहुत से छोटे पक्षी और जंतु नाचते-गाते और क्रीड़ा करते हुए बहुत ही खुश रहते थे। एक दिन ऊंचे पहाड़ के पार से दौड़ते हुए तीन भेड़िए वहां आए। उनमें एक नर और दो मादा थे। नर भूरे रंग का और दोनों ही मादाओं का रंग नीला था। जंगल के बीच घास के मैदान में पहुंचते ही उन तीनों के ही मुंह से निकला, ''वाह, यह जगह तो बहुत ही सुन्दर है! हमें यहां खाने पीने की तंगी भी न रहेगी। यहीं अपना घर बना लेते है।"
बस उसी वक्त से वन अशांत और असुरक्षित हो गया। आज मुर्गी का बच्चा खो गया, तो कल कोई सुनहरी मादा हिरन गायब हो गयी। लम्बे समय से रह रहे छोटे-छोटे पक्षी और छोटे जानवर मुसिबत में फंस गये। कुछ वहां से भागकर कहीं दूसरी जगह पर शरण लेने को मजबूर होने लगे। जो कहीं और जा पाने की स्थिति में न थे गुफाओं में छिपने लगे, ऊंचे-ऊंचे पेड़ों पर घोंसला बनाने लगे। दिन दोपहरी में डरते रहते और रात के अंधेरें में तो बाहर निकलने का साहस ही नहीं करते।
वहीं एक छोटा खरगोश भी रहता था, जिसका नाम ल्वोचू था। उसने न तो भागकर कहीं और शरण लेनी चाही और न ही कहीं छुप जाना उसे उचित लगा। हिंसक भेड़ियों से निपटने के लिए वह वहीं रुका रहा और कोई कारगर उपाय सोचने लगा।

तिब्बती लोक कथाओं को आप यहां भी पढ़ सकते हैं -
tibetan folk tales
digital library of tibetan folk tales
folktales from tibet

2 comments:

DR.ANURAG ARYA said...

उम्मीद है आप कथाये पूरी करेंगे.......

vijay gaur said...

धन्यवाद डा. अरुण जी. ब्लाग देखते रहिये.ल्वोचू खरगोश की कथा तो पोस्ट करुंगा ही. अन्य तिब्बति लोक कथायें भी करने का प्रयास रहेगा.