Sunday, February 5, 2012

अन्छुए किनारों को देखने का सुयोग



 




6 comments:

अजित वडनेरकर said...

सुंदर मनमोहक चित्र ।
जी को तरावट मिली ।

पारुल "पुखराज" said...

हर चित्र एक कविता सा …

Anup Sethi said...

अरबी के पत्ते पर पारे की तरह पानी की चपल बूंद का रहस्य रोमांच हमने बचपन में बहुत देखा है. बड़ा जादुई और मनमोहक बिंब है. आपके चित्रों ने वह आश्चूर्यलोक साकार कर दिया. इस बिंब को मैंने अपनी एक कविता में भी पिरोया है.

धीरेश said...

विशाल, बहुत सुंदर, दोस्त।

परमेन्द्र सिंह said...

बहुत सुन्दर छायांकन ! जियो विशाल !!

अनूप शुक्ल said...

सुन्दर फ़ोटो हैं।