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Tuesday, June 16, 2026

अवधेश कुमार की कहानी: पानी में तैरता शलगम

 

 

 
 
(अवधेश कुमार पर केन्द्रित इस सीरीज में आज उनकी कहानी ‘पानी में तैरता शलगम ’ राजेश सकलानी की टिप्पणी के साथ दे रहे हैं ) 

इस कहानी के मूल में दुनिया भर में चल रहे कला-विषयक भावोत्तेजक प्रयोग हैं। औद्योगिकीकरण के प्रभाव से सामाजिक व्यवहार में बड़े बदलाव आए हैं। नए किस्म के दृश्य और ध्वनियों से सामना हुआ। वैश्विक राजनीति ने व्यक्ति को असहज और अस्थिर कर दिया। अच्छे जीवन के स्वप्न की तुलना में आत्मिक सुख कम होता गया। बाज़ार को लुभावने विज्ञापनों की ज़रूरत पड़ी।

इस कहानी में Henri Matisse एक पात्र है, जो सफ़ेद काग़ज़ की कतरनों के साथ सफ़ेद हाथी का दुःस्वप्न चित्रित करेगा। कोलाज विधा ने पेंटिंग की विधा को समूचा बदल दिया। कैनवस की सपाट सतह पर अब कतरनें आदि वास्तविक वस्तुएँ चिपकाई जा सकती थीं। कुछ समय पहले से चली आ रही परंपरा को अब कला-सिद्धांत के तर्क हासिल हो चुके थे। एक अन्य पात्र Pablo Picasso (1881-1973) ने स्वीकारते हुए कहा कि सिर्फ़ रंग लगाना ही नहीं, बल्कि वास्तविक चीज़ों को कैनवस पर चिपकाना भी कला है।इसे papier collé नाम दिया गया। अवधेश स्वयं एक बेहतरीन कोलाज कलाकार थे।

इस कथानक के अनुसार Jim Dine “एन वाल्डमैन के लिए चित्रित संसार”  शीर्षक चित्र में सेब की जगह शलजम चिपका कर  उसके नीचे बड़ी शान से हस्ताक्षर दे मारता है। सेब को अपूर्व ख्याति दिलाने वाले चित्रकारों में Paul Cézanne (France, 1839-1906) प्रमुख हैं। उन्होंने सेब का प्रयोग रंग, रोशनी और स्पेस की अवस्थिति को जानने के लिए किया। इसी तरह बेल्जियम के कलाकारों ने शलजम का खूब प्रयोग किया है। Vincent van Gogh  (Dutch, 1853-1890) की पेंटिंग Still Life of Turnips को याद करते हैं।वे भी कथा-पात्र हैं।

अवधेश दिल्ली की प्रदर्शनियाँ देखते थे और कला-विषयक पुस्तकें पढ़ते थे। उनका काम रेखाचित्र और कोलाज पर आधारित रहा। उन्होंने किसी कला संस्थान से विधिवत शिक्षा नहीं ली।यह कहानी उन्होंने एक पेंटिंग की तरह रची है। यह अपने आप  में जिम डाइन की चर्चित पेंटिंग “एन वाल्डमैन के लिए चित्रित संसार” की विवेचना है। साहित्य के पाठकों को यह बताना इसका उद्देश्य है कि चित्रकला, कला-संवेदन के आधार पर प्रकृति और मनुष्य के अंतर्संबंधों का विवेकसंगत उद्घाटन करती है। इसकी

संभावनाएँ असीमित हैं। अपनी ज्ञानात्मक संवेदना, कला-संवेदना, भावप्रवणता और अन्वेषणात्मक ऊर्जा को घनीभूत करते हुए नई राहें खोजी जा सकती हैं। एक चित्रकार किसी लिखित पाठ के अंतस में प्रवेश कर सकता है। कवयित्री Anne Waldman के रचनात्मक व्यक्तित्व को रूपाकारों में व्यक्त कर देना एक बड़ी बौद्धिक घटना है। अवधेश इस कहानी में यही कह रहे हैं। आधुनिक कला-आविष्कारों से अनुप्रेरित अवधेश रोशनी और स्पेस को दृश्य रूप में जान पाते हैं।इन पंक्तियों पर ध्यान देना रोचक होगा—

“जिम डाइन, एन को ढूँढ़ने एक बार अतीत में गया, दूसरी बार भविष्य में और तीसरी बार वर्तमान में। किन्तु एन फिर कभी उसकी पकड़ में नहीं आई। वह फिसल जाती थी—कभी अतीत में, कभी भविष्य में।”

यानि कला-अनुभव कौंध की तरह अनुभूत होते हैं। उन्हें कठिन साधना और धैर्य से पाया जाता है। आकस्मिकता का पल तभी संभवहोता है।

अवधेश की यह व्याख्या (interpretation) आगे जाकर तभी पूर्ण  होती है, जब वे स्वयं अतियथार्थवादी शैली में अपनी रचना तक  पहुँचने में क़ामयाब होते हैं। Salvador Dalí भी कथानक का पात्र है।

अंत तक पहुँचते हुए पेंटिंग-सदृश यह गद्य एक पेंटिंग की तरह  दृश्यमान होता है—


 ''कहते हैं कि जिम डाइन, टेस्ट ट्यूब की शक्ल के एक पॉलीथीन बैग में पानी भरता है और एन को उसके ऊपर स्टीकर की तरह चिपका देता है।

फिर—

कला की अभिव्यक्ति में परिवर्तन और विकास के ख़ातिर, संशोधित रूप में, उस लुंजपुंज पहलवान की जाँघ के बीच उसे लटका आता है।”

यहाँ पुरुष-लिंग का संदर्भ भी संभवतः किसी महान चित्रकार की पेंटिंग से जुड़ा है। कला की स्वायत्तता का कोई अर्थ नहीं है। महान कला प्रकृति का अन्वेषण करती है। उसकी विराटता का स्पर्श करती

है। केंद्र में मनुष्य की उपस्थिति हर सूरत में अनिवार्य है। महान कला या साहित्य अपने लोक से गहराई से जुड़कर आत्म के विस्तार पर संभव होता है। कलाकार दुनिया के लिए यह ज़िम्मेदारी लेता है।

सच्चाई यह है कि वही प्राकृतिक सौंदर्य को सच्चाई के साथ अनुभव करता है। हिमालय के सौंदर्य की अनुभूति चरवाहों और घसियारियों से ज़्यादा गहन कोई नहीं कर सकता। बस, वे इस अनुभूति के बदले में कोई खास पहचान पाने को उत्सुक नहीं होते।

उच्च हिमालय की एक अधेड़ किसान महिला को अपने एकांत में गाते सुना। किसी श्रोता के लिए नहीं, बल्कि निर्जन जंगल में अपनी उदासी और पीड़ा को व्यक्त करने के लिए। किसी अदृश्य शक्ति को संबोधित करते हुए उसका आलाप किसी भी दक्ष गायक से ज़्यादा मार्मिक और परिपक्व लगा। सामने बर्फ़ से आच्छादित चोटियाँ, विशालकाय चट्टानें और घने जंगल दृश्य में उभरने लगे।

आत्म के विस्तार से कला सामान्य जनों की अनुभूति तक पहुँचसकती है।

अवधेश की यह कहानी ऐसी संभावनाओं की रचना है।

-राजेश सकलानी 

(इस आलेख के साथ यहां प्रदर्शित दो चित्र चित्रकार जिम डाइन के कला शिल्प और अवधेश कुमार की कहानी के आधार पर AI द्वारा तैयार किए गए  हैं।) 

 

 



 

   पानी में तैरता शलगम


पिकासो के गुलाबी कैनवस से कूदकर एक नौसिखिया सरकसी, औरतों की तैरनेवाली पोशाक पहने, धीरे-धीरे हेनरी मूर के शिल्प की तरह ठोस और  ठंडा होकर जमीन पर फैल गया।

जैक्सन पोलाक आया और उस चिकने कठोर बुत के शरीर पर रंगों के छींटे मारने लगा; वह उसकी बेहोशी दूर करना चाहना था और एक ओझा की तरह, उस पर चिपटे हुए किसी भूत को उतारना चाहता था।

पास ही, जिमडाइन

 एन वाल्डमैन के साथ घूम रहा था 

और पूछ रहा था कि -

"स्त्री कहाँ है ?"

"प्रेमिका ?"

एन वाल्डमैन ने कविता की शक्ल में पूछा: और मोनालिजा की तरह देखने लगी लियोनार्दो दा विची की घनी दाढ़ी में। खोजने लगी एक भ्रूण उसके बालों में।

मर्दों के बालों में कभी जूं तक नहीं रेंगती और उनमें छुपे हुए किसी तिनके को कोई भ्रूण, अपने अंगूठे की तरह नहीं चूसता ।

जिमडाइन बौखलाता है मृत पथरीले पहलवान पर और एन वाल्ड-मैन की कविता पर : और 'एन वाल्डमैन के लिए चित्रित् संसार' शीर्षक चित्र में सेब की जगह शलगम चिपकाकर, उसके नीचे बड़ी शान से अपने हस्ताक्षर दे मारता है।
‘मॉर्डन आार्ट इन प्रिट्स'  शीर्षक पुस्तिका कहती है कि तकनीकी लिहाज से छापने में सबसे कठिन यह प्रिट...और हम उस पर उभरे लाल पीले नीले  और सतरंगी दिल खिलते हुए देखते हैं। तभी तम्बाकू के पान का शौकीन एक कलाप्रेमी पुरुष उस पर पीक थूकता है।

'एन बाल्डमैन के लिए चित्रित संसार' यकायक एक चौंधियाए हुए आईन में तब्दील हो जाता है- जिसके नीचे दाएँ कोने पर जिम डाइन का हस्ताक्षर शेष है; और पान की पीक से नहा रहा है।

और बारिश शुरू हो रही है; उस बारिश के नीचे एक गमला रख गया ज्यॉर्ज ब्राक: और बताने लगा कि मातीस अभी आएगा रंगीन कागज की कतरनों के साथ और इन्द्रधनुप की मायावी छतरी के नीचे 'सफेद हाथी का दुःस्वप्न' चित्रित करेगा।

मैं कहता हूँ जिम डाइन से, मन-ही-मन। और दूर बैठीं एन से भी, मन-ही मन। कि आओ इस बीच श'गाल के कैनवस में चलें। नरम और गरम और आरामदेह। ओस में भोगी मुलायम हरी, पीली घास। मोटे फूलों और फूली हुई पत्तियों से लदे आदिम अँधेरे गमले : उजले गाढ़े वीर्य-सा टपका हुआ बूंद-भर चाँद और एक हिंसक स्वतन्त्रता , ऐसो कि जी चाहे कि कोई हमें कैनवस की दूसरी तरफ से नग्न और लिपटा हुआ देख ले।

गैलरी में दूर तक सन्नाटा ।

और फिर बारिश ।

पानी बढ़ रहा है ऊपर

और ऊपर

गैलरी में।

गमला डूब रहा है: पत्थर-पहलवान के काले शरीर पर चिपके रंग, धुल-धूलकर उतर रहे हैं।

सफ़ेद हाथी अपनी सूँड उठा रहा है। गैलरी का निर्माता और चौकीदार पिकासो हाथ हिलाता हुआा आ रहा है।

मैं जिम डाइन हो गया हूँ

जिम डाइन-एन

एन-पहलवान

और पहलवान-शलगम ।

 बारिश में तैर रहा है और इन्द्रधनुष की बाईं नींव  में अपने को अपने लिए अपने आप  बो दिए  जाने की प्रतीक्षा में है।

इन्द्रधनुष की दाईं नींव के समीप स्थावर और जंगम काल्डर अपने कबाड़ के साथ जमीन की तरफ दूरबीन गड़ाए बैठा है।


मतलब कि एक पुरुष गर्भ धारण कर रहा है।

 मतलब कि इस्पात के गर्भाशय को महीन दाँतों वाली बिजली की आरी से चीर रहा है।

इधर एक कहानी पढ़ने को मिलती है. जितने मुंह उतनी बातें. कि जिम डाइन-एन को ढूँढने एक बार अतीत में गया, दूसरी बार भविष्य में और तीसरी बार वर्तमान में।

किन्तु एन फिर कभी उसकी पकड़ में नहीं आई। वह फिसल जाती थी। कभी अतीत में। कभी भविष्य में।

इस भूलभुलैया में भटकते और भागते-भागते जब वह थककर शिथिल हो गयाः और अचानक सत्वाडोर डाली के प्रति-यथार्थवादी संसार में पहुंचा तो उसने देखा कि कला की अभिव्यक्ति में परिवर्तन और विकास के लिए मानव शरीर को एनाटोमी तोड़ने की सिफारिश करने वाले कला-कारों के बीच, एन सेब लिए बैठी है।

‘एन बाल्ड्मेन के लिए चित्रित संसार' शीर्षक कैनवस के ऊपर चिटखी हुई प्लास्टिक को एक गुडिया के रूप में ! जिसके उदर में लॉकर के भीतर रखा हुआ कच्चे इस्पात का मुलायम भ्रूण।
अन्त में, कहते हैं कि जिम डाइन, टेस्ट ट्यूब की शक्ल के एक पॉलिथिन बैग में पानी भरता है: बौर एन को, उसके ऊपर स्टीकर की तरह चिपका देता है।

फिर-

कला की अभिव्यक्ति में परिवर्तन और विकास की खातिर संशोधित रूप में, उस लुंजपुंज पहलवान की जांघ के बीच उसे लटका आता है।